Generic Medicines Kya Hai – Detailed Guide 2021

Generic Medicine – Medicines यानी की दवाइयों का हमारी हेल्थ से बहुत गहरा कनेक्‍शन होता है ये बात सही है कि अगर हम फिट और हेल्दी रहते हैं तो दवाइयों की बहुत कम ही जरूरत पड़ती है।

लेकिन फिर भी हम सभी को कभी न कभी दवा तो लेनी ही पड़ती है और जब डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन को लेकर हम मेडिकल शॉप पर जाते हैं तो कई बार दुकानदार ऐसी दवा निकालकर देता है जो ब्रांडेड मेडिसिन का Generic Version होती है और उसका प्राइस भी कम होता है।

तो ऐसे में ये सवाल आपके मन में आता होगा कि ये कौनसी दवाई है जिनकी प्राइस Comparatively कम है और शॉपकीपर हमें ये दवा लेने का Suggestion क्यों दे रहा है।

क्या ये जेनरिक दवाइयां रियल में अच्छी होती है या फिर सस्ती दवा का मतलब लो क्वालिटी तो नहीं।

ऐसे बहुत सारे सवालों के जवाब आपको इस पोस्ट में मिलने वाले है।

इसलिए इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें ताकि मेडिसिन जैसे इंपॉर्टेंट टॉपिक पर आपका ये कॉन्सेप्ट क्लियर हो सके। चलिए शुरू करते हैं और Generic Medicine के बारे में डिटेल में जानते हैं।

जब कभी भी मेडिसिन और ड्रग की बात आए तो कन्फ्यू ना हो इसे इस तरीके से समझें कि सभी मेडिसिन्स ड्रग्स होती है लेकिन सभी ड्रग्स मेडिसिन्स नहीं होती।

मेडिसिन्स अक्सर नॉन एडिटिंग होती है जबकि ड्रग्स एडिक्शन पैदा करती है और इससे हेल्थ पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

वैसे जेनरिक मेडिसिन्स के बारे में हम क्या सोचते हैं ऐसा सोचा जाता है कि Generic Medicine सस्ती होती है इसीलिए ये कम इफेक्टिव होगी और ये जरूर ब्रैंड नेम प्रोडक्ट का डुप्‍लीकेट वर्जन होगी।

जबकि असल में ऐसा नहीं होता है। ये दवाएं उतनी ही इफेक्टिव और सेम क्वॉलिटी की होती है जितनी ब्रांडेड मेडिसिन होती है तो अब सवाल ये है कि ये जेनरिक मेडिसिन्स है क्या आखिर।

Generic Medicine Kya Hoti Hai?

Generic Medicine Kya Hoti Hai

जेनरिक का मतलब होता है सामान्य। यानी ये जेनरिक दवाएं सामान्य दवाएं हुई लेकिन इसका मतलब इनकी क्वॉलिटी का कम होना बिलकुल नहीं है।

Generic Medicine एक मेडिसिन है जो उसे ब्रांडेड मेडिसिन से Dose, Safety, Strength, Quality, Usage में सेम होती है।

जो आलरेडी मार्केट में अपनी पहचान रखती है ये जेनेरिक मेडिसिन बिल्कुल ब्रांडेड मेडिसिन की तरह ही वर्क करती है यानी सेम क्लिनिकल बेनिफिट्स को प्रोवाइड करती है।

यानी आप चाहे तो ब्रांडेड मेडिसिन खरीदें या चाहे जेनेरिक मेडिसिन के जरिए अपने हैल्थ इशू को ठीक कर ले दोनों का impact सेम ही होगा।

जेनेरिक मेडिसिन आपकी जेब पर पड़ने वाले वजन को थोड़ा कम जरूर कर सकती है। अब सवाल ये है कि जेनरिक मेडिसिन ब्रैंड नेम मेडिसिन की तरह work कैसे करती है।

Generic Madicines Brand Name Madicines की तरह Work कैसे करती है?

इसका जवाब ये है कि जेनरिक मेडिसिन्स में ब्रैंडेड मेडिसिन्स की तरह सेम इंग्रेडिएंट्स यूज किए जाते हैं इसलिए उसका बॉडी पर असर रिस्क और बेनिफिट बिल्कुल वैसा ही है जैसा ब्रांडेड मेडिसिन का होता है।

और इतना जानने के बाद फिर एक सवाल आता है कि अगर जेनेरिक और ब्रांडेड मेडिसिन्स सेम होती है तो ब्रैंड नेम मेडिसिन अपने जेनेरिक वर्जन से अलग क्यों दिखाई देती है

Brand Name Medicines Generic से अलग क्यों दिखाई देती है ?

तो इसका जवाब ये है कि ट्रेडमार्क लॉस के अकॉर्डिंग एक जेनेरिक मेडिसिन actually उस मेडिसिन की तरह नहीं दिख सकती है जैसी ब्रांडेड मेडिसिन ऑलरेडी मार्केट में है।

इन दोनों तरह की मेडिसिन्स में शेप साइज, पैकेजिंग, कलर्स, फ्लेवर्स, डिफरेंट हो सकते हैं जो इनकी परफॉर्मेंस और सेफ्टी को अफेक्ट नहीं करते।

और जब बात की जाए कि जेनेरिक मेडिसिन्स मार्केट में कब आती है तो इस सवाल का जवाब जानने से पहले आपको ये प्रोसेस समझना होगा।

हर मेडिसिन के दो नाम होते हैं एक ब्रैंड नेम जो उसे फार्मास्युटिकल कंपनी के द्वारा दिया जाता है जो उस मेडिसिन को मार्केट में लाती है और एक जेनरिक नेम जो उस मेडिसिन का एक्टिव इंग्रीडिएंट्स होता है और Brand Name Medicine की तरह ही वर्क करता है।

जब कोई फार्मास्युटिकल कंपनी एक न्यू एक्टिव इंग्रेडिएंट्स वाली दवा पहली बार मार्केट में लेकर आती है तो उसे कई सालों तक पेटेंट के जरिये प्रोटेक्ट रखा जाता है।

इस पेटेंट की बदौलत ही उस दवा को बनाने वाली कंपनी को ये अधिकार मिल जाता है कि उसे नई दवा बनाने में जितना खर्च करना पड़ा उतना प्रॉफिट वो कमा सके।

इस दौरान कोई भी दूसरी कंपनी उस प्रोटेक्टेड एक्टिव इंग्रीडिएंट्स वाली सिमिलर मेडिसिन मार्केट में नहीं ला सकती।

इस दवा को क्लिनिकल स्टडीज के जरिए डिस्कवर और डेवेलप करने में उस कंपनी को बहुत खर्च करना पड़ता है और इस खर्च को पेटेंट ड्यूरेशन के दौरान पूरा कर लिया जाता है।

लेकिन जो पेटेंट एक्सपायर हो जाता है तब दूसरी कंपनीज को ये परमीशन मिल जाती है कि वो उस एक्टिव इंग्रेडिएंट्स पर बेस्ड मेडिसिन बना लें।

इन्हीं दवाओं को Generic Medicines कहा जाता है। ऐसी बहुत सी दवाएं आपको मार्केट में मिल जाएंगी लेकिन उनका एक्टिव इंग्रेडिएंट्स सेम ही होगा।

इसी साथ एक बहुत ही कॉमन सवाल है कि जेनरिक मेडिसिन का प्राइस कम क्यों होता है ?

Generic Medicines का Price कम क्यों होता है ?

तो यहां पर जेनेरिक मेडिसिन के सस्ते होने का रीजन ये है कि जब एक बार ब्रैंड नेम मेडिसिन को बनाने में क्लिनिकल स्टडी कर ली जाती है और सेफ्टी और effectivenss को major कर लिया जाता है तब जेनेरिक वर्जन को बनाते टाइम इस प्रोसेस को रिपीट करने की जरूरत नहीं पड़ती जिससे उनकी कॉस्ट कम हो जाती है और मार्केट में भी वो कम दामों में ही मिल जाती है।

इसके अलावा जेनेरिक मेडिसिन मार्केट में होने से कॉम्पिटिशन का माहौल भी बन जाता है जिससे कस्टमर को लो प्राइस में मेडिसिन लेने का अवसर मिल जाता है।

वैसे आपको ये भी पता होना चाहिए कि इंडिया जेनेरिक मेडिसिन्स का बिगेस्ट एक्सपोर्टर है जो यूएस, यूरोप, अफ्रीका जैसे कई डेवलप्ड देशों को जेनरिक दवाएं एक्सपोर्ट करता है तो इतना सब कुछ जान लेने के बाद एक सवाल तो बनता है कि जेनेरिक मेडिसिन्स इतनी फेमस क्यों नहीं है ये पॉपुलर क्यों नहीं है?

Generic Medicines इतनी Famous क्यों नहीं है?

इसका जवाब है कि Govt of india इन जेनरिक दवाओं का प्रमोशन तो करती है ताकि आमजन इन सस्ती दवाओं का फायदा उठा सकें।

लेकिन मेडिसिन्स के प्रति पब्लिक की जो इग्नोरेंस है वो जेनरिक दवाओं से पब्लिक को मिलने वाले फायदे को बढ़ने नहीं देती।

इसका एक रीजन भरोसे की कमी भी है जिसे बड़ी आसानी से जीता जा सकता है। अगर सरकार के जरिए अवेयरनेस कैम्पेन चलाया जाए और फिजीशियन और फार्मासिस्ट जैसे ऑथेंटिक सोर्स इनके लिए पेशेंट्स को जागरूक कर सकें तो ये हो सकता है।

और अगर बात करें। क्या वाकई में जेनेरिक मेडिसिन्स की अच्छी क्वॉलिटी एक्सपोर्ट हो जाती है तो इसका जवाब है कि ऐसा भी माना जाता है कि जेनरिक दवाओं की अच्छी क्वॉलिटी एक्सपोर्ट कर दी जाती है और Low Quality की जेनेरिक मेडिसिन्स इंडियन मार्केट में बेच दी जाती है।

अब इसमें कितनी सच्चाई है या कोई सच्चाई है भी या नहीं। क्या ये जेनेरिक मेडिसिन्स की सेल कम करने के लिए उड़ाई गई कोई अफवाह है या फिर इसमें कुछ सच भी है।

ये सब तो हम भी नहीं जानते लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि एक ग्राहक के तौर पर हम सबका अवेयर होना और हर चीज जांच परखकर ही खरीदना और इस्तेमाल करना जरूरी है।

फिर चाहे वो मेडिसिन्स ही क्यों न हो। कुल मिलाकर के बात ये है कि इस अफवाह को साइड रखकर समझें तो ब्रैंड नेम मेडिसिन और जेनेरिक मेडिसिन में क्वॉलिटी वाइज कोई फर्क नहीं होता है और दोनों का इफेक्ट सेम होता है।

इन्हें भी पढ़ें:-

Conclusion

तो दोस्तो अब Generic Medicines से जुड़ी सारी जानकारी आपके पास है और मैं उम्मीद है कि मेरी ये कोशिश आपको जरूर पसंद आई होगी।

Generic Medicines से जुड़ी इस जानकारी को समझना भी आपके लिए काफी आसान रहा होगा तो आपको जानकारी मिली है तो प्लीज अपने दोस्तों और जिनको इसकी जरूरत है उनको यह [ Generic Medicines Kya Hai ] पोस्ट शेयर करना बिल्कुल ना भूलें।

Thank you for reading

 

You may also like...